सारा गुजरात प्रांत के गौर एवं भारत के अन्य राज्य के गया तीर्थपुरोहित पंडित श्री अनुप भाई बिट्ठल हाथीवाला

Pandit Shri Anup Bhai Bitthal Hathiwala, the priest of Gaya Tirth of the entire Gujarat province and other states of India

Pandit Shri Anup Bhai Bitthal Hathiwala - Gaya

गया में पिंडदान का महत्व

गया में पिंडदान का बहुत महत्व है। यह एक धार्मिक प्रथा है जिसमें पितरों (पूर्वजों) की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान किया जाता है। गया में पिंडदान करने से 108 कुलों और 7 पीढ़ियों का उद्धार होता है और उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होती है, ऐसी धार्मिक मान्यता है।

* पितृ पक्ष के दौरान, गया में पिंडदान करने के लिए देश-विदेश से तीर्थयात्री आते हैं।

पिंडदान के प्रकार एवं सेवाएँ

नारायण बलि

यह विशेष रूप से उन लोगों के लिए किया जाता है जिनकी अप्राकृतिक मृत्यु हुई हो, जैसे कि सर्पदंश, दुर्घटना, डूबने, आग लगने या आत्महत्या से हुई मृत्यु।

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त्रिपिंडी श्राद्ध

यह सभी प्रकार की मृत्यु के लिए पिंडदान करने के लिए किया जाता है। इससे पितरों की अतृप्ति दूर होती है।

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पितृ पक्ष श्राद्ध

यह श्राद्ध कर्म है जो हर साल पितृ पक्ष के दौरान किया जाता है, जिसमें पूर्वजों को श्रद्धांजलि दी जाती है।

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पितृ दोष निवारण

जिनकी कुंडली में पितृ दोष है, उनके लिए तर्पण कर्म, ब्राह्मणों को भोजन-वस्त्र भेंट और पितृ आराधना की जाती है।

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कालसर्प दोष निवारण

यह दोष आर्थिक, स्वास्थ्य और समृद्धि के लिए खतरा बन सकता है। गया जी में इसकी शांति का विशेष विधान है।

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तीन/पांच/सात पिंडदान

तीन पिंडदान: पिता, दादा और परदादा के लिए।
पांच पिंडदान: पांच पीढ़ियों के लिए।
सात पिंडदान: सात पीढ़ियों के लिए विशेष परिस्थितियों में।

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